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डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 81 वर्षीय बुजुर्ग से 7.12 करोड़ रुपये ठगे

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डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 81 वर्षीय बुजुर्ग से 7.12 करोड़ रुपये ठगे

हैदराबाद:
साइबर अपराधियों ने “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर हैदराबाद के एक 81 वर्षीय बुजुर्ग से करीब 7.12 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को मुंबई पुलिस और सरकारी एजेंसियों से जुड़ा अधिकारी बताकर बुजुर्ग को मानसिक रूप से डराया और दबाव बनाया।

पुलिस के अनुसार, ठगों ने बुजुर्ग को बताया कि उनका नाम एक मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध लेन-देन के मामले में सामने आया है। उन्हें कहा गया कि उनके आधार कार्ड, बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों में हुआ है।

वीडियो कॉल पर दिखाया गया “डिजिटल अरेस्ट”

ठगों ने बुजुर्ग को वीडियो कॉल पर रखा और दावा किया कि उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” किया गया है। उन्हें चेतावनी दी गई कि अगर उन्होंने किसी को इस बारे में बताया, तो तुरंत जेल भेज दिया जाएगा।

ठगों ने बुजुर्ग को डराने के लिए:

  • फर्जी पुलिस अधिकारी की वर्दी
  • नकली आईडी कार्ड
  • कोर्ट और सरकारी विभागों के नाम
    का इस्तेमाल किया।

पैसे ट्रांसफर करने का दबाव

डर और तनाव में आकर बुजुर्ग ने अलग-अलग बैंक खातों से कई बार में 7.12 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने कहा कि यह रकम “जांच के लिए” ली जा रही है और बाद में वापस कर दी जाएगी।

कुछ समय बाद जब बुजुर्ग को शक हुआ, तब उन्होंने परिजनों को जानकारी दी और साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस की अपील

पुलिस ने स्पष्ट किया कि:

  • भारत में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती
  • कोई भी पुलिस या सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगती
  • इस तरह की कॉल आने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें

डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या है? – पूरी जानकारी

डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या होता है?

डिजिटल अरेस्ट स्कैम एक नया और खतरनाक साइबर फ्रॉड है, जिसमें ठग लोगों को यह झूठा विश्वास दिलाते हैं कि:

  • वे किसी अपराध में फंस गए हैं
  • पुलिस या एजेंसी ने उन्हें “डिजिटल रूप से गिरफ्तार” कर लिया है
  • अगर वे बात नहीं मानेंगे तो तुरंत जेल होगी

असल में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी व्यवस्था भारत में मौजूद नहीं है

स्कैमर्स कैसे जाल बिछाते हैं?

  1. फर्जी कॉल या वीडियो कॉल
    • खुद को CBI, ED, पुलिस या कोर्ट अधिकारी बताते हैं
  2. डर और मानसिक दबाव
    • मनी लॉन्ड्रिंग
    • ड्रग्स केस
    • फर्जी सिम या बैंक फ्रॉड
      जैसे गंभीर आरोप लगाते हैं
  3. अलग-थलग करना
    • कहते हैं किसी को बताया तो गिरफ्तारी हो जाएगी
    • पीड़ित को घंटों वीडियो कॉल पर रखते हैं
  4. पैसे की मांग
    • “जांच फीस”
    • “अकाउंट वेरिफिकेशन”
    • “सिक्योरिटी डिपॉजिट”
      के नाम पर पैसा ट्रांसफर करवाते हैं

इस स्कैम में बुजुर्ग क्यों ज्यादा शिकार होते हैं?

  • कानून की जानकारी कम होना
  • पुलिस और सरकारी नाम से डर जाना
  • तकनीकी समझ सीमित होना
  • जल्दी भरोसा कर लेना

इसी वजह से ठग खासतौर पर सीनियर सिटीज़न को टारगेट करते हैं।

कैसे पहचानें डिजिटल अरेस्ट स्कैम?

✔ फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की बात
✔ तुरंत पैसे भेजने का दबाव
✔ “किसी को मत बताना” जैसी धमकी
✔ WhatsApp / Skype / Zoom कॉल
✔ फर्जी वर्दी और आईडी

अगर इनमें से कोई भी संकेत दिखे, तो समझ लें यह 100% स्कैम है।

क्या करें अगर ऐसी कॉल आए?

  • घबराएं नहीं
  • कॉल तुरंत काट दें
  • कोई पैसा ट्रांसफर न करें
  • 1930 पर कॉल करें
  • cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें
  • परिवार के किसी सदस्य से तुरंत बात करें

डिजिटल अरेस्ट स्कैम आज के समय का सबसे खतरनाक साइबर फ्रॉड बन चुका है। डर और झूठे कानून के नाम पर लोगों की जिंदगी भर की कमाई लूटी जा रही है।

👉 याद रखें:
भारत में कोई भी पुलिस या सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या पैसे की मांग नहीं करती।


साइबर अपराध होने पर शिकायत कैसे दर्ज करें? (How to Report Cyber Crime)

अगर आपके साथ या आपके किसी जानने वाले के साथ डिजिटल अरेस्ट स्कैम या किसी भी तरह का साइबर अपराध हुआ है, तो तुरंत नीचे दिए गए कदम उठाएँ:

1. तुरंत 1930 पर कॉल करें

भारत सरकार द्वारा जारी नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर – 1930 पर तुरंत कॉल करें।
यह नंबर 24×7 सक्रिय रहता है और शुरुआती समय में कॉल करने से ठगी गई रकम को फ्रीज़ किया जा सकता है।


2. ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें

आप घर बैठे भी साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कर सकते हैं:

🔗 वेबसाइट: cybercrime.gov.in

यहाँ आप निम्न मामलों की शिकायत कर सकते हैं:

  • ऑनलाइन फ्रॉड / स्कैम
  • डिजिटल अरेस्ट स्कैम
  • बैंक / UPI धोखाधड़ी
  • सोशल मीडिया अकाउंट हैक
  • ऑनलाइन धमकी या ब्लैकमेल

3. जरूरी सबूत सुरक्षित रखें

शिकायत दर्ज करने से पहले और बाद में ये सबूत जरूर संभालकर रखें:

  • कॉल रिकॉर्डिंग या स्क्रीनशॉट
  • WhatsApp / SMS चैट
  • बैंक ट्रांजैक्शन डिटेल
  • UPI / अकाउंट नंबर
  • फर्जी आईडी या वीडियो कॉल के स्क्रीनशॉट

4. नजदीकी पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करें

ऑनलाइन शिकायत के बाद आप:

  • नजदीकी पुलिस स्टेशन
  • साइबर क्राइम सेल

में जाकर FIR या जनरल डायरी (GD) भी दर्ज करा सकते हैं।


5. परिवार को जरूर जानकारी दें

स्कैमर्स पीड़ित को अकेला और डरा हुआ रखने की कोशिश करते हैं।
इसलिए:

  • परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति को तुरंत बताएं
  • कोई भी फैसला अकेले न लें

महत्वपूर्ण चेतावनी

⚠️ कोई भी पुलिस, CBI, ED या सरकारी एजेंसी:

  • फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती
  • पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती
  • “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई प्रक्रिया नहीं अपनाती

अगर कोई ऐसा दावा करे, तो वह 100% साइबर ठग है।


AjeyTalks की अपील

साइबर अपराध से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार है — जागरूकता और सही समय पर रिपोर्टिंग
डरें नहीं, चुप न रहें और तुरंत रिपोर्ट करें।

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